Wednesday, February 23, 2011

गब्बर सिंह की चरित्र-चित्रण


शोले के गब्बर सिंह की बुरे तो सब करते है पर किसी ने उसकी अच्छाइयों पर कभी नजर नहीं डाली| आइये डालते है उसके कुछ निस्वार्थ कर्मो और गुणों पर एक नजर:
1. सादा जीवनउच्च विचारउसके जीने का ढंग बड़ा सरल था.पुराने और मैले कपड़ेबढ़ी हुई दाढ़ीमहीनों से जंग खाते दांत औरपहाड़ों पर खानाबदोश जीवनजैसे मध्यकालीन भारत का फकीर हो.जीवन में अपने लक्ष्य की ओर इतना समर्पित कि ऐशो-आराम औरविलासिता के लिए एक पल की भी फुर्सत नहींऔर विचारों मेंउत्कृष्टता के क्या कहने! 'जो डर गयासो मर गयाजैसे संवादों सेउसने जीवन की क्षणभंगुरता पर प्रकाश डाला था.


दयालु प्रवृत्ति: ठाकुर ने उसे अपने हाथों से पकड़ा थाइसलिए उसने ठाकुर के सिर्फ हाथों को सज़ा दीअगर वोचाहता तो गर्दन भी काट सकता थापर उसके ममतापूर्ण और करुणामय ह्रदय ने उसे ऐसा करने से रोक दिया.


3. 
नृत्य-संगीत का शौकीन: 'महबूबा ओये महबूबागीत के समय उसके कलाकार ह्रदय का परिचय मिलता है.अन्य डाकुओं की तरह उसका ह्रदय शुष्क नहीं थावह जीवन में नृत्य-संगीत एवंकला के महत्त्व को समझता था.बसन्ती को पकड़ने के बाद उसके मन का नृत्यप्रेमी फिर से जाग उठा थाउसने बसन्ती के अन्दर छुपी नर्तकी कोएक पल में पहचान लिया थागौरतलब यह कि कला के प्रति अपने प्रेम को अभिव्यक्त करने का वह कोई अवसरनहीं छोड़ता था.


4. 
अनुशासनप्रिय नायक: जब कालिया और उसके दोस्त अपने प्रोजेक्ट से नाकाम होकर लौटे तो उसने कतईढीलाई नहीं बरतीअनुशासन के प्रति अपने अगाध समर्पण को दर्शाते हुए उसने उन्हें तुरंत सज़ा दी.

5. 
हास्य-रस का प्रेमी: उसमें गज़ब का सेन्स ऑफ ह्यूमर थाकालिया और उसके दो दोस्तों को मारने से पहलेउसने उन तीनों को खूब हंसाया थाताकि वो हंसते-हंसते दुनिया को अलविदा कह सकेंवह आधुनिक यु का'लाफिंग बुद्धाथा.


6. 
नारी के प्रति सम्मानबसन्ती जैसी सुन्दर नारी का अपहरण करने के बाद उसने उससे एक नृत्य कानिवेदन कियाआज-कल का खलनायक होता तो शायद कुछ और करता.


7. 
भिक्षुक जीवन: उसने हिन्दू धर्म और महात्मा बुद्ध द्वारा दिखाए गए भिक्षुक जीवन के रास्ते को अपनाया था.रामपुर और अन्य गाँवों से उसे जो भी सूखा-कच्चा अनाज मिलता थावो उसी से अपनी गुजर-बसर करता था.सोनाचांदीबिरयानी या चिकन मलाई टिक्का की उसने कभी इच्छा ज़ाहिर नहीं की.


8. 
सामाजिक कार्य: डकैती के पेशे के अलावा वो छोटे बच्चों को सुलाने का भी काम करता थासैकड़ों माताएंउसका नाम लेती थीं ताकि बच्चे बिना कलह किए सो जाएंसरकार ने उसपर 50,000 रुपयों का इनाम घोषित कररखा थाउस युग में 'कौन बनेगा करोड़पतिना होने के बावजूद लोगों को रातों-रात अमीर बनाने का गब्बर का यहसच्चा प्रयास था.

9. महानायकों का निर्माता: अगर गब्बर नहीं होता तो जय और वीरू जैसे लुच्चे-लफंगे छोटी-मोटी चोरियां करतेहुए स्वर्ग सिधार जातेपर यह गब्बर के व्यक्तित्व का प्रताप था कि उन लफंगों में भी महानायक बननेकी क्षमता जागी






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