Friday, February 19, 2010

सिर्फ 1411 बाघ ही बचे हैं, कहीं बच्चो को ये न बताना पड़े की, बेटा हमारा राष्ट्रीय पशु "?????" हैं.

आप सोच रहे होगे की ये मैंने दुबारा क्यों पोस्ट किया हैं तो मैं आपको बता दू की मेरे जैसे ही इस दुनिया में कई लोग ऐसे हैं जो आपने अलावा भी किसी के बारे मे सोचते हैं उन्ही में से एक काफी ही अच्छे विचार वाले व्यक्ति नरेंदर नेगी ने इसमें कुछ सुधार किया हैं और इसे दुबारा से प्रकाशित करने का आग्रह किया हैं इसलिए मैंने इसे दुबारा प्रकाशित कर रहा हु.


सिर्फ 1411 बाघ ही बचे हैं, कहीं बच्चो को ये न बताना पड़े की, बेटा हमारा राष्ट्रीय पशु "?????" हैं. 
 
Just 1411 left. जैसा की आपको फोटो को देखकर ही पता चल गया होगा की मैं आप सब के सामने क्या विचार रखना चाहता हूँ. पिछले दिनों में मैंने जब ये देखा की हमारे भारतवर्ष देश में जहाँ का राष्ट्रीय पशु  बाद्य  (चीता)  हैं  बाद्य सिर्फ एक हमारा राष्ट्रीय पशु नहीं है, यह भी खाद्य श्रृंखला के एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो प्रकृति में संतुलन बनाए रखता है. और  जैसा कि पिछले दशको पहले हमारे देश में इनकी संख्या लगभग 40,000 के आस-पास थी लेकिन अब इनकी संख्या सिर्फ 1411 ही रह गयी हैं.  यह एक खतरनाक संकेत है.  और सबमे कहीं न कहीं हमारा ही दोष हैं, कैसे ???

कुदरत और प्रकृति ने हमारे देश को ही नहीं बल्कि पूरी पृथ्वी को जीवन से नवाजा हैं और हर तरफ जहाँ भी नजर जाती हैं वहां हमें इस जीवन की विभिन्न उदहारण देखने को मिल जायंगे. और कुदरत ने सब को अपने मुताबिक जीवन व्यापन करने का हक़ दिया हैं. लेकिन हम मनुष्यों ने तो सिर्फ ये एक सोच बना ली हैं की ये पृथ्वी सिर्फ हमारी हैं और सारा अधिपत्य इसपर हमारा ही हैं. क्या ये हम सही कर रहे हैं ???? लेकिन मैं आपको बतलाना चाहता हु की हम भी पहले कभी इन बेजुबानो की तरह ही थे..... और हमने अपने आप को इतना विकसित किया की हम बाकियों को भूल गए. लेकिन अपने विकास के लिये किसी के घर मे घुसना और उनको मारना क्या उचित है. वो बेजुबान जानवर है पर हम क्या इन्सान कहलाने लायक है ??????????
 
      शायद में भी इसके बारे में कभी बात नहीं करता, अगर में ये न देखता. लेकिन अब मुझे भी दुःख होता हैं की पिछले कुछ दशको में जो इनकी संख्या में इतनी गिरावट आई हैं की हमारी आने वाली नयी पीड़ी को हमें इनके बारे में बताने के लिए उन्हें किसी संग्राहलय में ले जाना पड़ेगा जहाँ पर इनकी भी हड्डियों का एक ढाचा या इनका पुतला बना होगा ठीक वैसे ही जैसे हमें अभी डायनासोरो के बने होते हैं.  और Jim Corbett National Park & Ranthambore National Park मे बाद्य नही उनके पध चिन्हो को देख्नने जाया करेंगे.


और तो और हो सकता हैं की हमारे देश का राष्ट्रीय पशु के सूचक के रूप में हमें कोई और जीव मिल जाये...............
लेकिन क्या ये सही हैं और कितने हद तक ??????
अभी भी हमने कुछ न किया तो शयद ये नौबत आ जाये की हम अपने बछो को आगे चल कर ये बताये की :-
बेटा हमारा राष्ट्रीय पशु "?????" हैं.
और उसने हमसे गलती से ये प्रश्न पूछ लिया की पहले तो हमारा राष्ट्रीय पशु बाद्य  (चीता ) था लेकिन अब कैसे बदल गया ? तो आप लोग तैयार हैं न इसका जवाब देने के लिए........... 
 
 अब आप लोग सोचंगे की इसमें हम क्या कर सकते हैं, इनके अवैध शिकार को कैसे रोकेंगे , लेकिन हम नही करेंगे तो कौन करेगा ? कैसे !!
 
बहुत आसान है, लोगो को जागरुक करके, SAVE TIGER आभियान मे हिस्सा ले कर और जानवरो की खालो से बनी चीजो का बहिष्कार करके.
हम सिर्फ़ ये सोच कर कि, ये तो सरकार का काम है, हमे चुप नही बैठना चाहिये. हमे आगे बडकर, पहल करके इस अभियान को सफल बनाने मे मदद करनी चाहिये. 
 
मैंने तो तैयारी कर ली हैं की मुझसे जितना होगा में उतना इसके बारे में दुसरे लोगो को जागरूक करूँगा. आप भी करे.
और धन्यवाद् दे Aircell कंपनी को जिन्होंने इसके लिए लोगो को जागरूक करने के लिए अपना एक कदम इस दिशा की ओर बढाया हैं और हमें याद दिलाया की ......
हमने अपने जीवन को तो सवार लिया लेकिन उन बेजुबानो का क्या दोष था?
 देखे Save The Tigars और आप भी इस मुहीम में जुड़े.  
 
 SAVE TIGER  !      SAVE EARTH  !

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